क्यों बेचनी पड़ रही है Bisleri? किया बेटी का जिक्र! कंपनी मालिक ने बताई असली वजह

बोतलबंद पानी यानी पैकेज्ड पानी... अगर आप इसे किसी दुकान से खरीदना चाहते हैं तो सबसे पहले दिमाग में बिसलेरी का नाम आता है।  

अब यह ब्रांड बिकने जा रहा है।  हालांकि, यह देश के बाहर नहीं जा रहा है और ग्राहकों को संभवत: इसी नाम से यह मिलता रहेगा।  

दरअसल, कंपनी के प्रमुख रमेश चौहान ने इसे बेचने का फैसला किया है और टाटा  कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड खरीदारी की दौड़ में सबसे आगे है।  

लेकिन सवाल पूछे जा रहे हैं कि देश का सबसे लोकप्रिय ब्रांड होने और अच्छा कारोबार करने के बावजूद यह बिक्री के लिए क्यों आया?

रमेश चौहान का बयान  खबरों के मुताबिक, 'बिसलेरी इंटरनेशनल' के चेयरमैन और प्रमुख कारोबारी रमेश चौहान ने गुरुवार को कहा

कि वह अपने बोतलबंद पानी के कारोबार के लिए खरीदार की तलाश कर रहे हैं और टाटा की एक कंपनी से भी बातचीत कर रहे हैं.  

जब उनसे पूछा गया कि बिसलेरी कारोबार को बेचने के पीछे क्या वजह है?   उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी न किसी को इस कंपनी का प्रबंधन करना होगा,  इसलिए

हम सही रास्ते की तलाश कर रहे हैं।  उनकी बेटी की व्यवसाय चलाने में कम  रुचि है।  हालांकि, उन्होंने कहा कि सिर्फ बातचीत चल रही है, डील फाइनल  नहीं हुई है।

1969 में खरीदी गई थी Bisleri  साल 1969 में कारोबारी घराने चौहान परिवार के नेतृत्व वाली पारले (Parle) ने बिसलेरी (इंडिया) लिमिटेड को खरीद लिया था.

जब इस कंपनी को चौहान ने खरीदी थी तो उनकी उम्र उस समय केवल 28 साल थी. उस समय केवल 4 लाख रुपये में बिसलेरी कंपनी का सौदा हुआ था. 

1995 में इसकी कमान रमेश जे चौहान के हाथों में आ गई. इसके बाद पैकेज्ड  वाटर का कारोबार इस तेजी से दौड़ा कि अब बोतलबंद पानी की पहचान बन गया है.

भारत में पैकेज्ड वाटर का मार्केट 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का है. इसमें  से 60 फीसदी हिस्सा असंगठित है. बिस्लेरी की संगठित बाजार में हिस्सेदारी  करीब 32 फीसदी है.