चाणक्य नीति के अनुसार जीवन की चार परिस्थिति मनुष्य को अंदर ही अंदर कर देती हैं खत्‍म

आचार्य चाणक्य को राजनीति, अर्थशास्त्र, धर्म, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान जैसे कई विषयों का गहरा ज्ञान था।

चाणक्य ने कई ऐसे शास्त्रों की रचना की जो आज भी मनुष्य के लिए उपयोगी हैं।  उन्होंने अपनी

नीतियों में कई ऐसे उपाय बताए हैं, जिनकी मदद से व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।

साथ ही परेशानियों और बाधाओं को दूर किया जा सकता है।  आचार्य चाणक्य सामान्य

पारिवारिक जीवन की जानकारी देते हुए उन बातों की बात करते हैं जो व्यक्ति को भीतर से मार देती हैं।

आचार्य चाणक्य का कहना है कि एक पुरुष के लिए सबसे दर्दनाक बात अपनी पत्नी से अलग होना है।

इस व्यक्ति में दुनिया में सब कुछ भुला दिया जाता है।  क्योंकि एक पत्नी अपने पति के साथ-साथ पूरे परिवार का

भी ख्याल रखती है।  पत्नी के जाने के बाद पति को हर मोड़ पर पत्नी की याद आती है।  इस अलगाव में पति भीतर से जलता है।

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जब किसी व्यक्ति का घर में सम्मान नहीं होता है,  तो उसे अंदर ही अंदर अपराधबोध से भरा जीवन जीना पड़ता है।

अपनों के अनादर के कारण व्यक्ति धीरे-धीरे भीतर से जलता है और कुछ समय बाद मृत व्यक्ति के समान हो जाता है।