आचार्य चाणक्य को भारतीय राजनीति, कूटनीति और अर्थशास्त्र का पितामह कहा जाता है। 

उन्होंने अपनी नीतियों में ना केवल सफलता के मूलमंत्र का उल्लेख किया है बल्कि जीवन के हर पहलू पर बात की है। 

उन्होंने मनुष्य को जीवन की कई ऐसी गूढ़ बातें बताई है जिसे मानकर व्यक्ति जीवन में कभी भी मात नहीं खा सकता।  

चाणक्य नीति के मुताबिक किसी भी मनुष्य के लिए पत्नी का वियोग, अपने ही लोगों द्वारा बेइज्जत किया जाना 

कर्ज, दुष्ट राजा की सेवा करना और गरीब ब कमजोर लोगों की सभा में शामिल होना सबसे बड़ी कष्टकारी स्थिति होती है।  

ये छह बातें मनुष्य को बिना अग्नि के ही जला देती है। 

कान्ता वियोगः स्वजनापमानि । ऋणस्य शेषं कुनृपस्य सेवा ।। कदरिद्रभावो विषमा सभा च । विनाग्निना ते प्रदहन्ति कायम् ।।

उपरोक्त चाणक्य के श्लोक का अर्थ ये है कि जिस व्यक्ति की पत्नी छोड़कर चली जाती है, उसका दर्द वही समझ सकता है। 

वहीं व्यक्ति अपनों द्वार जब बेइज्जत होता है तो ये बहुत बड़ा कष्ट होता है। 

ये एक ऐसी कष्टकारी पीड़ा होती है जो जिसे मनुष्य के लिए भूला पना काफी मुश्किल होता है। 

इससे भी अधिक कष्टकारी दुष्ट राजा की सेवा करना होता है।