असफलता से घबराएं नहीं चाणक्य नीति के अनुसार एक बार जब आप कोई काम शुरू करते हैं, तो असफलता से नहीं डरना चाहिए

असफलता से घबराएं नहीं चाणक्य नीति के अनुसार एक बार जब आप कोई काम शुरू करते हैं, तो असफलता से नहीं डरना चाहिए  

और न ही उस कार्य को बीच में छोड़ना चाहिए. हमेशा ईमानदारी से अपने कार्य करते रहने वाले लोगों की जीत होती है.

और न ही उस कार्य को बीच में छोड़ना चाहिए. हमेशा ईमानदारी से अपने कार्य करते रहने वाले लोगों की जीत होती है. 

कामयाबी ऐसे लोगों को अवश्य मिलती है चाणक्य नीति के अनुसार अवसर आने पर प्रतिभा दिखाने से नहीं चूकना चाहिए.

कामयाबी ऐसे लोगों को अवश्य मिलती है चाणक्य नीति के अनुसार अवसर आने पर प्रतिभा दिखाने से नहीं चूकना चाहिए.  

जो लोग अवसर आने पर आलस्य करते हैं बाद में ऐसे लोग हाथ मलते रह जाते हैं और पूरी जिंदगी अफसोस करते हैं.

जो लोग अवसर आने पर आलस्य करते हैं बाद में ऐसे लोग हाथ मलते रह जाते हैं और पूरी जिंदगी अफसोस करते हैं.  

अवसर पर खरा उतरने के लिए व्यक्ति को सदैव तैयार और तत्पर रहना चाहिए. किसी भी स्थिति से निपटने के लिए और उसका लाभ लेने के लिए व्यक्ति को सर्तक रहना चाहिए.

अवसर पर खरा उतरने के लिए व्यक्ति को सदैव तैयार और तत्पर रहना चाहिए. किसी भी स्थिति से निपटने के लिए और उसका लाभ लेने के लिए व्यक्ति को सर्तक रहना चाहिए. 

जो व्यक्ति इन बातों को ध्यान में रखता है वह जीवन में कभी असफलता का मुंह नहीं देखता है और कामयाबी उसके साथ चलती है.

जो व्यक्ति इन बातों को ध्यान में रखता है वह जीवन में कभी असफलता का मुंह नहीं देखता है और कामयाबी उसके साथ चलती है. 

सच बोलने वाले का हर जगह सम्मान होता है चाणक्य नीति के अनुसार झूठ बोलने वाले व्यक्ति अपयश ही पाते हैं.

सच बोलने वाले का हर जगह सम्मान होता है चाणक्य नीति के अनुसार झूठ बोलने वाले व्यक्ति अपयश ही पाते हैं.  

प्रश्न करने में संकोच न करें चाणक्य नीति के अनुसार शिक्षक से कभी भी शिक्षा लेने में शर्म नहीं करनी चाहिए.

प्रश्न करने में संकोच न करें चाणक्य नीति के अनुसार शिक्षक से कभी भी शिक्षा लेने में शर्म नहीं करनी चाहिए.  

क्रोध आपका सबसे बड़ा शत्रु है चाणक्य नीति के अनुसार व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु उसका क्रोध होता है. गुस्से में व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति नष्ट हो जाती है.

क्रोध आपका सबसे बड़ा शत्रु है चाणक्य नीति के अनुसार व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु उसका क्रोध होता है. गुस्से में व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति नष्ट हो जाती है.