अन्न, वर्षा का जल और दीये की रौशनी का इस्तेमाल इस  हालातों में बिल्कुल भी न करें

आचार्य चाणक्य ने व्यावहारिक जीवन के बारें में बहुत सी नीतियां बताई है। चाणक्य एक कुशल राजनीतिज्ञ  

के साथ - साथ महान विद्धानों में से एक आते है। उन्होंने एक नीति शास्त्र की रचना की है. 

जिसमे उन्होंने मनुष्य के जीवन से जुड़ी कई बातों का जिक्र किया है। यदि इन बातों को ध्यान 

में रखा जाए तो व्यक्ति समस्याओं से बच सकता है। साथ ही एक संतुष्ट और सफल जीवन भी व्यतीत कर सकता है। 

भोजन, पानी, वर्षा, उजाला ये सब मनुष्य के जीवन की जरूरी चीजें हैं, लेकिन आचार्य चाणक्य ने इनकी अति के 

बारे में भी जिक्र किया है। चाणक्य नीति के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में इन चीजों की अधिकता सही नहीं होती। 

ऐसी जगहों पर इनका होना व्यर्थ माना जाता है। आइए चाणक्य नीति के अनुसार जानते हैं  

कि ऐसी कौन सी चीजें और परिस्थितियां हैं, जिन्हे व्यर्थ माना गया है.